Dekho Uttarakhand

बदलती जीवनशैली और अनियमित खान-पान से बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

 


हर साल मार्च महीने के दूसरे गुरुवार को विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को किडनी से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक करना और समय रहते बचाव के उपायों की जानकारी देना है। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण किडनी रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

किडनी हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को फिल्टर करने के साथ-साथ शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है। कुशीनगर के चिकित्सक डॉ. रवि कुशवाहा बताते हैं कि किडनी शरीर के ‘नेचुरल फिल्टर’ की तरह काम करती है और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

डॉ. कुशवाहा के अनुसार अधिकतर लोग किडनी की सेहत को तब तक गंभीरता से नहीं लेते, जब तक इसकी कार्यक्षमता काफी हद तक प्रभावित नहीं हो जाती। किडनी से जुड़ी शुरुआती समस्याओं के लक्षण अक्सर सामान्य थकान, पाचन संबंधी परेशानी या शरीर में हल्की सूजन के रूप में दिखाई देते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने बताया कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी खराब होने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

पानी और नमक के सेवन पर रखें नियंत्रण

डॉ. कुशवाहा का कहना है कि दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलने में मदद मिलती है। हालांकि जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी किडनी पर दबाव डाल सकता है। सामान्य रूप से एक व्यक्ति को दिनभर में लगभग 2.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए। इसके अलावा नमक का अत्यधिक सेवन भी किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक रोजाना करीब 5 ग्राम नमक का सेवन ही पर्याप्त माना जाता है।

बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचें

डॉ. कुशवाहा ने चेतावनी देते हुए कहा कि सिरदर्द या शरीर दर्द होने पर लोग अक्सर बिना सलाह के पेनकिलर दवाओं का सेवन कर लेते हैं, जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इन दवाओं के अधिक और लगातार उपयोग से किडनी में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और ‘एक्यूट किडनी इंजरी’ का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

नियमित जांच और बीपी-शुगर पर रखें नियंत्रण

किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नियमित जांच कराना भी जरूरी है। डॉ. रवि कुशवाहा के अनुसार हर साल कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) और यूरिन टेस्ट जरूर कराना चाहिए, खासकर उन लोगों को जो डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं।

इसके साथ ही नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन को नियंत्रित रखना भी किडनी की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।

(साभार)

Post a Comment

Previous Post Next Post